रणवीर सिंह और करण जौहर के दुखों का अंत नहीं, इस बार मणिरत्नम की PS-2 बनेगी बर्बादी की वजह!
अगर करण जौहर पीछे नहीं हटे तो साल 2023 में पहली बार बॉलीवुड और दक्षिण की सीधी भिड़ंत टिकट खिड़की पर देखने को मिलेगी. चूंकि करण और रणवीर से मुकाबले में मणिरत्नम की PS-2 है, समझ सकते हैं कि इसका असर क्या होगा?
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एक लंबे वक्त से बॉक्स ऑफिस पर लोगों के गुस्से का सामना कर रहे करण जौहर के धर्मा प्रोडक्शन और उनके चहेते अभिनेता रणवीर सिंह की बर्बादी का सिलसिला ख़त्म होता नहीं दिख रहा. टिकट खिड़की पर साल 2022 दोनों के लिए भयावह साबित हुआ. भारी बजट में बनी करण जौहर की जुग जुग जियो, लाइगर और ब्रह्मास्त्र जैसी फ़िल्में हादसा साबित हुईं. सिनेमाघरों से उनकी एक भी फिल्म लागत तक नहीं वसूल कर पाई है. हालात ऐसे रहें कि 2022 में करण को अपनी दो फ़िल्में गहराइयां और गोविंदा नाम मेरा को ओटीटी पर रिलीज करना पड़ा. ठीक इसी तरह रणवीर सिंह भी कोविड से पहले सफलता के आसमान पर नजर आते हैं. लेकिन रणवीर भी कोविड के बाद सिनेमाघरों में हैट्रिक हादसे दे चुके हैं. उनकी 83, जयेशभाई जोरदार और सर्कस तीनों फ्लॉप साबित हुईं.
धर्मा के लिए तो कारोबारी लिहाज से 2022 एक कभी नहीं भूलने वाला साल साबित हो चुका है. शायद यही वजह रही कि नुकसान की भरपाई के लिए खुद करण जौहर को मैदान में उतरना पड़ा है. उन्होंने लंबे वक्त बाद रणवीर सिंह और आलिया भट्ट को लेकर एक रोमांटिक कॉमेडी "रॉकी और रानी की प्रेम कहानी" के निर्देशन का जिम्मा लिया. फिल्म की शूटिंग पूरी हो चुकी है. बॉलीवुड हंगामा के मुताबिक़ इसे अगले साल 28 अप्रैल के दिन रिलीज के लिए रिजर्व किया गया है. लेकिन लगता है कि करण जौहर और रणवीर की तकलीफों का अंत नहीं है फिलहाल. असल में 28 अप्रैल 2023 के दिन टिकट खिड़की पर एक बड़ा क्लैश होने जा रहा है. इसी दिन मणिरत्नम ने अपनी ऐतिहासिक महागाथा के दूसरे पार्ट को रिलीज करने का फैसला लिया है.
करण जौहर और रणवीर सिंह.
मणिरत्नम की यह महागाथा असल में पोन्नियिन सेलवन का दूसरा पार्ट (PS-2) है. पहला पार्ट इसी साल 30 सितंबर को पैन इंडिया रिलीज हुई थी. हिंदी बेल्ट में एक सुस्त प्रमोशन और बेहद कम स्क्रीन के बावजूद PS 1 ने 25 करोड़ से ज्यादा का कारोबार किया था. जबकि सभी भाषाओं में फिल्म का कलेक्शन 322 करोड़ रुपये से ज्यादा का रहा. पोन्नियिन सेलवन असल में इतिहास की सच्ची घटनाओं से प्रेरित चोल साम्राज्य की महागाथा है. एक ऐसा साम्राज्य जिसने हजार साल पहले समूची दुनिया में भारत की कीर्ति फैलाई. चोल साम्राज्य की उपलब्धियां आधुनिक दुनिया के लिए भी एक बेंचमार्क हैं. पोन्नियिन सेलवन में विक्रम, जयराम रवि, कार्ति, ऐश्वर्या राय बच्चन, तृषा कृष्णन जैसे कलाकारों ने अहम भूमिकाएं निभाई हैं.
क्यों करण जौहर के लिए खतरे की घंटी है PS-2?
बॉलीवुड फिल्मों के खिलाफ जो नैरेटिव बना उसमें दक्षिण की फिल्मों को हाथोंहाथ लिया गया. अब एक ही तारीख पर बॉलीवुड फिल्म यानी "रॉकी और रानी की प्रेम कहानी" के सामने सक्सेसफुल फ्रेंचाइजी का दूसरा पार्ट यानी PS-2 होगी तो बताने की जरूरत नहीं कि बॉक्स ऑफिस का समीकरण करण जौहर के लिए कितना विपरीत हो सकता है. सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के बाद से वे भारी विरोध का सामना कर रहे हैं. और उन्हें कारोबारी फ्रंट पर किस तरह के नुकसान उठाने पड़े हैं यह भी कोई बताने बात नहीं है अब. उनकी कई बड़ी फ़िल्में सिनेमाघरों में डूबी हैं. जाहिर सी बात है कि एक बड़ा नुकसान उन्हें उठाना पड़ा है.
देखें तो इस क्लैश की वजह से PS-2 को इस बार हिंदी बेल्ट में जबरदस्त हाइप मिलने वाली है. मणिरत्नम के लिए हिंदी वर्जन के प्रमोशन की शायद ही जरूरत पड़े. पहले वर्जन का कारोबार कमजोर प्रमोशन और पर्याप्त स्क्रीन्स नहीं मिल पाने की वजह से ज्यादा नहीं था. लेकिन दक्षिण की फिल्म के लिहाज से संतोषजनक कहा जाएगा. अब नए समीकरण और बॉलीवुड बनाम दक्षिण की डिबेट में मणिरत्नम की फिल्म को खुद ब खुद हाथोंहाथ लिया जाएगा. बहुत हद तक संभावना है कि हिंदी बेल्ट में PS-2 का कारोबार रॉकी और रानी की प्रेम कहानी की वजह से बहुत-बहुत बेहतर रहे. मणिरत्नम की यह फिल्म भी कन्नड़ और तेलुगु इंडस्ट्री के फिल्मों की तरह हिंदी बेल्ट से जादुई कलेक्शन निकाले. पहले पार्ट ने 25 करोड़ कमाए थे.
हालांकि यह बदले हालात में कंडीशंस पर निर्भर करता है. क्योंकि अगर करण पीछे हट गए तो क्लैश निरर्थक हो जाएगा. अगर करण जौहर PS-2 के आने के बावजूद अपनी फिल्म की रिलीज शेड्यूल नहीं बदलते हैं तो उन्हें टिकट खिड़की पर चुनौती से जूझना पड़ेगा. क्योंकि PS-2 ने उनकी रिजर्व डेट में टांग अड़ा दी है. हो सकता है कि यह लायका प्रोडक्शन की एक रणनीति ही हो और वह हिंदी बेल्ट में बॉलीवुड बनाम दक्षिण की बहस को कारोबारी रूप से भुनाने की कोशिश में हों. कुल मिलाकर गेंद अब करण जौहर के पाले में है. अगर वे शेड्यूल बदलते हैं तो कहा जा सकता है कि दक्षिण की महागाथा से डर गए. और तारीख नहीं बदलते हैं तो टिकट खिड़की पर उन्हें और रणवीर सिंह को शायद एक और नाकामी का सामना करना पड़े.
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