तेलंगाना में चुनाव है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री तेलंगाना में हैं और रैलियों पर रैलियां कर रहे हैं और अपने स्वाभाव के अनुरूप आतिशी बयान दे रहे हैं. योगी के मुकाबले में एएमआईआईएम के असदुद्दीन ओवैसी हैं. ओवैसी को तेलंगाना का एक तेज तर्रार नेता माना जाता है. साथ ही ओवैसी मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों, विशेषकर हैदराबाद और सिकंदराबाद के मुस्लिम वोटरों के बीच अपनी ठीक ठीक पकड़ भी रखते हैं. चूंकि सामने चुनाव है तो जुबानी जंग अपने जोरों पर है.
यदि योगी आदित्यनाथ की रैलियों का अवलोकन किया जाए तो सामने आता है कि वो मौके का पूरा फायदा उठा रहे हैं और लगातार हिन्दू वोटरों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं. वहीं जब हम ओवैसी बंधुओं की रैली पर नजर डालें तो मिलता है कि वो भी तुष्टिकरण का भरपूर फायदा उठा रहे हैं और उनका भी प्रयास यही है कि, वो ऐसा क्या कहें जिससे लोग आकर्षित हों और वोट एएमआईआईएम की झोली में आएं.
तेलंगाना चुनावों के मद्देनजर भाजपा की तरफ से योगी आदित्यनाथ और एएमआईआईएम की ओर से ओवैसी बंधू जैसे हमले एक दूसरे पर कर रहे हैं. कहना गलत नहीं है कि स्थिति किसी युद्ध की है जिसमें बाजी कौन मारेगा? इस प्रश्न का उत्तर हमें वक़्त दे देगा.
बात आगे बढ़ाने से पहले योगी के एक बयान पर नजर डाल लें. योगी, ओवैसी के गढ़ हैदराबाद में थे.वहां उन्होंने जो कहा उस लहजे को देखकर खुद ब खुद साफ हो जाता है कि योगी पूरा मन बनाकर...
तेलंगाना में चुनाव है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री तेलंगाना में हैं और रैलियों पर रैलियां कर रहे हैं और अपने स्वाभाव के अनुरूप आतिशी बयान दे रहे हैं. योगी के मुकाबले में एएमआईआईएम के असदुद्दीन ओवैसी हैं. ओवैसी को तेलंगाना का एक तेज तर्रार नेता माना जाता है. साथ ही ओवैसी मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों, विशेषकर हैदराबाद और सिकंदराबाद के मुस्लिम वोटरों के बीच अपनी ठीक ठीक पकड़ भी रखते हैं. चूंकि सामने चुनाव है तो जुबानी जंग अपने जोरों पर है.
यदि योगी आदित्यनाथ की रैलियों का अवलोकन किया जाए तो सामने आता है कि वो मौके का पूरा फायदा उठा रहे हैं और लगातार हिन्दू वोटरों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं. वहीं जब हम ओवैसी बंधुओं की रैली पर नजर डालें तो मिलता है कि वो भी तुष्टिकरण का भरपूर फायदा उठा रहे हैं और उनका भी प्रयास यही है कि, वो ऐसा क्या कहें जिससे लोग आकर्षित हों और वोट एएमआईआईएम की झोली में आएं.
तेलंगाना चुनावों के मद्देनजर भाजपा की तरफ से योगी आदित्यनाथ और एएमआईआईएम की ओर से ओवैसी बंधू जैसे हमले एक दूसरे पर कर रहे हैं. कहना गलत नहीं है कि स्थिति किसी युद्ध की है जिसमें बाजी कौन मारेगा? इस प्रश्न का उत्तर हमें वक़्त दे देगा.
बात आगे बढ़ाने से पहले योगी के एक बयान पर नजर डाल लें. योगी, ओवैसी के गढ़ हैदराबाद में थे.वहां उन्होंने जो कहा उस लहजे को देखकर खुद ब खुद साफ हो जाता है कि योगी पूरा मन बनाकर आए हैं कि इस बार उनका उद्देश्य किसी भी सूरत में तेलंगाना और हैदराबाद के दुर्ग को जीतना है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार इसी फिराक में हैं कि कैसे भी करके वो यहां विजय पताका फहरा दें.
मुस्लिम तुष्टिकरण के नाम पर जैसे दलों द्वारा लोगों को ठगा गया इसपर भी योगी खासे नाराज दिखे और इस मुद्दे पर उन्होंने ओवैसी समेत तमाम विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें आड़े हाथों लेने का प्रयास किया.
चूंकि राजनीति अवसरवादिता का खेल है. ओवैसी ने भी योगी आदित्यनाथ के पुराने ज़ख्म कुरेद कर उन्हें इस बात का एहसास कराया कि अगर योगी डाल-डाल हैं तो वो भी पात-पात है.
तेलंगाना में जंग बदस्तूर जारी है. इधर से योगी कुछ कह रहे हैं. तो उधर से ओवैसी अपना राग अलाप रहे हैं. तेलंगाना में योगी क्यों इतना सख्त हैं? यदि इस विषय पर सवाल हो तो जवाब बस इतना है कि 'तुष्टिकरण' के नाम पर वो उन हिंदूवादी वोटों को आकर्षित करना चाहते हैं जिनके इधर या उधर होने से किसी भी दल को फायदा मिल सकता है. रही बात ओवैसी की तो जो उनका रवैया है उसको देखकर कहीं से भी ये कहना गलत नहीं है कि चुनाव तक जैसे जैसे एक के बाद एक उनके बयान सामने आएंगे इसका भी फायदा बीजेपी या फिर उसको मिलेगा जो हिन्दू हितों की बात करता है.
गौरतलब है कि पूर्व से लेकर वर्तमान तक आलोचना के नाम पर असदुद्दीन ओवैसी के बयान इतने प्रभावी होते हैं कि जहां एक तरफ उसे सुनकर कुछ लोग खुश होते हैं तो वहीं ऐसे लोगों की भी एक बड़ी संख्या है जिन्हें ये बयान आहत कर जाते हैं. नतीजा ये निकलता है कि जिसे वोट कहीं और करना होता है वो भी बीजेपी के पाले में चला आता है.
उपरोक्त बयान खुद हमारी बात की पुष्टि कर देता है और बता देता है कि तेलंगाना के रण में ओवैसी कितना भी मुस्लिम मुस्लिम चिल्ला लें मगर वो लगातर उन गलतियों को दोहरा रहे हैं जो उन वोटों को भी आकर्षित करेगी जो अब तक पोलिंग बूथ से दूरी बनाते रहे हैं.
ओवैसी को याद रखना होगा कि हैदराबाद हिंदुस्तान में है और जिस तरह के बयान वो लगातार दे रहे हैं वो न सिर्फ गलत हैं बल्कि मर्यादा भी इस बात की इजाजत नहीं देती कि वो ऐसी बयानबाजी करें जिससे लोगों के बीच की दूरियां कम होने के बजाए और अधिक बढ़ें.ओवैसी इस बात को जितना जल्दी समझ लें उतना बेहतर हैं वरना योगी बख्खियां उधेड़ने में माहिर हैं उन्हें पता है कि कौन सी रग को कितना दबाना है और व्यक्ति को कितना दर्द देना है.
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