गुजरात में रेवड़ी नहीं 'रेवड़ा' बांटने पर उतारू हैं केजरीवाल, 'हर महीने 30 हजार की सौगात...'
आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) के नेता राघव चड्ढा (Raghav Chadha) चार्टर्ड अकाउंटेंट है. और, गुजरात विधानसभा चुनाव (Gujarat Assembly Elections) से पहले उन्होंने जितने बेहतरीन तरीके से ये सारी बचत और मदद को जुड़वा कर 30 हजार की सौगात बता दी है. कहना गलत नहीं होगा कि अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) गुजरात में रेवड़ी नहीं 'रेवड़ा' (Revadi Culture) बांटने पर उतारू हैं.
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'आम आदमी पार्टी की सरकार हर गुजराती को 30000 रुपये प्रति महीने की सौगात देगी.' ये कहना है आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का. वैसे, राघव चड्ढा ने केवल इतना ही नहीं कहा है. जैसे कोई कंपनी सैलरी स्लिप में अपने यहां काम करने वाले कर्मचारी को उसकी तनख्वाब का ब्रेक-अप (किस मद में कितने रुपये मिलेंगे) बताती है. उसी तरह राघव चड्ढा ने भी इन 30000 रुपयों का पूरा ब्रेक-अप बताया है.
राघव चड्ढा का कहना है कि 'गुजरात के हर परिवार की बिजली मुफ्त हो जाएगी. यानी 4000 रुपये बचेंगे. घर में दो बच्चे हैं. तो, उन्हें सरकारी स्कूलों में विश्वस्तरीय शिक्षा मिलेगी. यानी करीब 10 हजार रुपये यहां बचेंगे. मोहल्ला क्लीनिक और अस्पतालों के जरिये गुजरातियों के स्वास्थ्य पर होने वाले सारे खर्चे अरविंद केजरीवाल की सरकार उठाएगी. इससे हर महीने 7000 रुपये बचेगा. जिन घरों में दो बेरोजगार युवा हैं, उन्हें नौकरी मिलने तक 3000 रुपये बेरोजगारी भत्ता मिलेगा. यानी 6000 रुपये की सौगात मिलेगी. 18 वर्ष से ज्यादा आयु की हर महिला को 1000 रुपये की आर्थिक मदद की जाएगी. जिन घरों में 3 महिलाएं हैं, तो 3000 रुपये की सौगात केजरीवाल सरकार देगी. अगर इन सारे खर्चों का कुल जमा लगभग 30 हजार रुपये होगा. जो अरविंद केजरीवाल सरकार की ओर से हर गुजराती को सौगात मिलेगी.'
वैसे, आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा चार्टर्ड अकाउंटेंट है. और, उन्होंने जितने बेहतरीन तरीके से ये सारी बचत और मदद को जुड़वा कर 30 हजार की सौगात बता दी है. कहना गलत नहीं होगा कि अरविंद केजरीवाल गुजरात में रेवड़ी नहीं 'रेवड़ा' बांटने पर उतारू हैं.
ऐसे ही वादे पंजाब में भी किए गए थे. लेकिन, मुफ्त बिजली छोड़ अभी तक कई गारंटियों का नंबर नहीं आ सका है.
पैसा कहां से लाएंगे केजरीवाल?
पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के कुछ ही दिनों बाद ही मुख्यमंत्री भगवंत मान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी. और, पंजाब के लिए 50 हजार करोड़ के प्रति वर्ष का स्पेशल पैकेज मांगा था. भगवंत मान ने पंजाब की वित्तीय स्थिति सुधारने के लिए इस पैकेज की मांग की थी. जबकि, भाजपा का दावा था कि अरविंद केजरीवाल की गारंटियों यानी रेवड़ियों के वादों को पूरा करने के लिए ये स्पेशल पैकेज मांगा जा रहा था. खैर, बताना जरूरी है कि पंजाब में किए गए तमाम वादों में से कई अभी पूरे नहीं किए जा सके हैं. महिलाओं को 1000 रुपये की आर्थिक मदद वाली सौगात हो या बेरोजगारी भत्ता की गारंटी पंजाब में अभी तक ये वादे ही पूरे नहीं किए गए हैं. हां, महिलाओं को आर्थिक मदद देने की योजना पर काम चल रहा है. लेकिन, इसमें भी केवल उन्हीं महिलाओं को शामिल करने की बात चल रही है, जो अकेले घर का बोझ उठाती हैं. आसान शब्दों में कहें, तो हर महिला को आर्थिक मदद देने की योजना में भी शर्ते लागू कर दी गई हैं. इतना ही नहीं, मुफ्त बिजली का वादा भी कई शर्तों के साथ लागू हुआ है. जिस पर काफी बवाल हुआ था.
गुजरात चुनाव से जुड़े अहम विषयों पर अहमदाबाद से प्रेस कॉन्फ़्रेंस । LIVE https://t.co/dMqzLpsEgS
— Raghav Chadha (@raghav_chadha) November 24, 2022
खैर, मैं राघव चड्ढा की तरह चार्टर्ड अकाउंटेंट तो नहीं हूं. लेकिन, बजट जैसी चीजें समझ लेता हूं. तो, राघव चड्ढा के हिसाब से जिस परिवार में तीन महिलाएं, दो बेरोजगार, दो बच्चे होंगे. उन परिवारों को अरविंद केजरीवाल की ओर से गुजरात में सरकार बनवाने के बाद ये सौगात मिलना शुरू हो जाएगी. लेकिन, असल मामला ये है कि इन तमाम सौगातों के लिए पैसा कहां से आएगा. गुजरात की जनसंख्या 7 करोड़ से थोड़ी ज्यादा है. मोटे तौर पर 1.2 करोड़ परिवार गुजरात में रहते हैं. और, अरविंद केजरीवाल की 30000 रुपये महीना की इस सौगात के साथ ये कुल खर्च एक साल में करीब 4.3 लाख करोड़ तक पहुंच जाएगा. वैसे, इस 30 हजार रुपये महीने की सौगात से एक चीज तो तय हो जाएगी कि किसी को काम करने की जरूरत नहीं होगी. क्योंकि, शिक्षा-स्वास्थ्य-घर खर्च जैसे तकरीबन सारे खर्चे आम आदमी पार्टी की सरकार ही उठाने लगेगी. लेकिन, अहम बात ये है कि इसके लिए अरविंद केजरीवाल पैसा कहां से लाएंगे? क्या इन वादों को पूरा करने के लिए भी वो केंद्र सरकार से स्पेशल पैकेज की मांग करेंगे? क्योंकि, गुजरात में राजस्व के जरिये हर साल करीब 1.8 लाख करोड़ ही सरकार कमाती है.
रेवड़ी और कल्याणकारी योजनाओं में फर्क करना सीख लीजिए
कुछ समय पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने 'रेवड़ी कल्चर' को एक गंभीर समस्या माना था. लेकिन, रेवड़ी कल्चर के समर्थकों की ओर से तर्क दिया जाता है कि जनकल्याण की योजनाओं के नाम पर भी लोगों को रेवड़ियां ही बांटी जाती हैं. तो, अगर लोगों को बिजली-पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी चीजों के लिए मुफ्त योजनाएं दी जाती हैं. तो, ये क्यों गलत है? दरअसल, रेवड़ी कल्चर और जनकल्याण की योजनाओं में फर्क करना जरूरी है. इस बात में कोई दो राय नहीं है कि शिक्षा और बिजली-पानी के मामले में अरविंद केजरीवाल ने बेहतरीन काम किया है. लेकिन, दिल्ली जैसे छोटे राज्य में ये तमाम चीजें की जा सकती हैं. लेकिन, पंजाब और गुजरात जैसे राज्यों में इस तरह के वादे पूरे कर पाना संभव नहीं है.
इन मुफ्त की योजनाओं की वजह से सरकार के लिए खर्च और राजस्व के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होगा. और, धीरे-धीरे राज्य पर कर्ज बढ़ता जाएगा. इसे देखते हुए सभी राजनीतिक दल भी इसी रेवड़ी कल्चर को फॉलो करने लगेंगे. और, कुछ तो इससे भी आगे जा सकते हैं. जिसकी वजह से लोगों में मुफ्तखोरी का चलन बढ़ने लगेगा. आप खुद ही सोचिए कि हर परिवार को 30 हजार रुपये महीने की सौगात देकर क्या लोगों को मुफ्तखोर बनाने की ओर नहीं बढ़ाया जा रहा है. अगर लोगों को सब चीजें इसी तरह आम आदमी पार्टी की सरकार ही देने लगेगी, तो फिर काम करने ही कौन जाएगा? कहना गलत नहीं होगा कि इस रेवड़ी कल्चर से देश में श्रीलंका जैसे हालात बनने में बस कुछ ही साल लगेंगे.
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