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Updated: 15 नवम्बर, 2018 10:27 PM
मृगांक शेखर
मृगांक शेखर
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मध्य प्रदेश में बीजेपी उम्मीदवार फातिमा रसूल सिद्दीकी की खूब चर्चा है. फातिमा रसूल का नाटकीय ढंग से बीजेपी में शामिल होकर टिकट हासिल करना भी काफी दिलचस्प है.

राजनीति में नयी नवेली फातिमा रसूल का मुकाबला भोपाल उत्तर सीट पर पांच बार से कांग्रेसी विधायक आरिफ अकील से है. ये जानते हुए भी कि आरिफ अकील के खिलाफ किसी भी उम्मीदवार का जीतना असंभव सा हो गया है. फातिमा को टिकट दिए जाने से दो तरह के कयास लगाए गए हैं. पहला ये कि शायद भाजपा इस सीट से चुनाव हारना तय मान चुकी है. और दूसरा, ये कि फातिमा को टिकट देकर बीजेपी सिर्फ एक रस्‍म अदा करना चाहती है कि उसने भी एक मुस्लिम महिला उम्‍मीदवार को टिकट दिया था. ताकि बाकी प्रदेश की ही नहीं, देश की मुस्लिम महिलाओं को संदेश दिया जा सके. सवाल है कि क्या एक बुजुर्ग लेकिन कद्दावर कांग्रेसी के मुकाबले बीजेपी की युवा मुस्लिम महिला उम्‍मीदवार का जोश रंग लाएगा?

बीजेपी की इकलौती मुस्लिम उम्मीदवार...

मध्य प्रदेश में भी बीजेपी के पास कोई जिताऊ मुस्लिम उम्मीदवार नहीं था. ठीक वैसे ही जैसे 2017 के यूपी चुनाव में बीजेपी को इस संकट से जूझना पड़ा था. खुद बीजेपी नेताओं ने ही पूछे जाने पर ये बात बतायी थी. एमपी में बीजेपी ने यूपी वाला किस्सा नहीं दोहराया है. ये भी बीजेपी की एक मजबूरी ही लगती है. कुछ कुछ वैसी ही मजबूरी जैसी यूपी में चुनाव जीतने के बाद एक मुस्लिम को मंत्री बनाने की हुई थी.

fatima rasool, shivraj singhदोपहर में बीजेपी ज्‍वाइन करने वाली फातिमा को शाम तक टिकट‍ मिल जाता है.

फातिमा रसूल मध्य प्रदेश में बीजेपी की इकलौती मुस्लिम उम्मीदवार हैं. कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में तीन मुस्लिम कैंडिडेट उतारे हैं जिनमें से एक आरिफ अकील भी हैं जिनके खिलाफ बीजेपी की ओर से फातिमा चैलेंज कर रही होंगी.

आरिफ अकील 2013 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने वाले इकलौते मुस्लिम विधायक थे. तब चुनाव मैदान में 6 मुस्लिम उम्मीदवार थे जिनमें से एक बीजेपी उम्मीदवार आरिफ बेग भी थे.

कांग्रेस की ओर से मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में इस बार तीन मुस्लिम उम्मीदवार उतारे गये हैं.

मप्र का एकमात्र मुस्लिम विधायक...

आरिफ अकील- जिसे हराना बीजेपी के लिए मुश्किल ही नहीं नामुमकिन हो चला हो. उसके मुकाबले फातिमा को बीजेपी का टिकट देना एक बच्चे को अखाड़े में झोंक देने जैसा लगता है.

arif aqueelभोपाल गैसकांड पीडि़तों की जमकर मदद करने वाले आरिफ अकील को उनकी दुआ हर चुनाव में काम आती है.

1984 के भोपाल गैस कांड के बाद आरिफ अकील ने लोगों की खूब मदद की और इलाके के लोगों पर उनकी पकड़ मजबूत होती चली गयी. कुछ दिन बाद यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री से कुछ ही दूरी पर उन्होंने आरिफ नगर डेवलप किया - और गैस त्रासदी से पीड़ित परिवारों को वहां बसाया भी.

आरिफ अकील का मजबूत पक्ष तो यही है कि वो अपने काम के बूते जीतते आये हैं और बरसों से उनके नाम का सिक्का चलता है. तीन बार से तो मध्य प्रदेश विधानसभा में वो अकेले मुस्लिम विधायक बने हुए हैं. लेकिन एक सच ये भी है कि अब वो बुजुर्ग हो चले हैं. बीजेपी को लगता है एक बुजुर्ग के खिलाफ युवा जोश उतार कर सियासी जुआ तो खेला ही जा सकता है.

बीजेपी को फातिमा ही क्यों पसंद आयीं

क्‍या संभावनाएं हैं फातिमा के सामने...

जिस सीट पर फातिमा किस्मत आजमाने जा रही हैं वहीं से उनके पिता 90 के दशक में दो बार कांग्रेस के विधायक रह चुके हैं. 20 साल पहले रसूल सिद्दीकी के इंतकाल के बाद उनकी पत्नी ने उसी सीट से कांग्रेस का टिकट पाने की काफी कोशिश की, लेकिन कामयाबी नहीं मिली. उनकी बेटी फातिमा ने देखा कि कांग्रेस में उनकी दाल नहीं गलने वाली तो उन्होंने बीजेपी की ओर हाथ बढ़ाया. बीजेपी ने भी फातिमा को हाथों हाथ लिया. दोपहर में फातिमा ने बीजेपी ज्वाइन किया और देर शाम होते होते बीजेपी की सात उम्मीदवारों वाली आखिरी सूची में उनका भी नाम शामिल हो गया. वैसे फातिमा को टिकट दिये जाने से कुछ स्थानीय दावेदार खासे नाराज भी हैं. उन्‍हें लग रहा है कि पार्टी हाईकमान को पार्टी के भीतर क्‍या एक भी मुस्लिम कैंडिडेट दिखाई नहीं दिया?

भोपाल उत्तर सीट से आरिफ अकील एक तरह से अजेय बन चुके हैं. ऐसा लगता है बीजेपी मान कर चल रही होगी कि जो भी आरिफ अकील के खिलाफ चुनाव लड़ेगा हार तय है. फिर सोचा होगा क्यों न जुआ ऐसे खेला जाये, जिसमें जीत की संभावना दिखे, और यदि हार जाएं तो मुस्लिम महिला की रहनुमाई की तारीफ मिले.

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मृगांक शेखर मृगांक शेखर @mstalkieshindi

जीने के लिए खुशी - और जीने देने के लिए पत्रकारिता बेमिसाल लगे, सो - अपना लिया - एक रोटी तो दूसरा रोजी बन गया. तभी से शब्दों को महसूस कर सकूं और सही मायने में तरतीबवार रख पाऊं - बस, इतनी सी कोशिश रहती है.

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