मेरा सारा फुटबॉल प्रेम तो बस फेसबुक स्टेटस के लिए था...
क्रोएशिया हार गई. फ्रांस जीत गया और फुटबॉल वर्ल्ड कप खत्म हो गया है. ये कितना दुखद है कि अब मुझ जैसे सीजनल फुटबॉल फैन को फेसबुक पर फुटबॉल वाले स्टेटस डालने के लिए 4 सालों का लम्बा इन्तेजार करना पड़ेगा.
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हां तो भइया मास्को के लुज्निकी स्टेडियम में फीफा विश्व कप के दौरान फ्रांस ने क्रोएशिया को हराकर इतिहास रच दिया है. भले ही 4- 2 से फ्रांस ने क्रोएशिया को हराया हो, मगर हम भारतीयों को बड़ी टेंशन हो गई है. कारण है हमारा फेसबुक. एक ऐसे वक़्त में जब गली के नुक्कड़ पर भुट्टा खाने से लेकर मॉल के फूड कोर्ट में बैठकर चाय पीने तक 49 दोस्तों को टैग किया जा रहा हो. उनसे उन पलों पर उनकी प्रतिक्रिया मांगी जा रही हो एक आदमी के सामने दुखों का पहाड़ है.
क्रोएशिया को हराकर फ्रांस ने दूसरी बार फुटबॉल विश्व कप पर कब्ज़ा किया है
मैं दूसरों का नहीं जानता. अपनी ही बात कहने में भलाई है. फ्रांस की इस जीत और क्रोएशिया को मिली हार के बाद, अब मेरे सामने सबसे बड़ा सवाल ये खड़ा हो गया है कि, मैं ऐसी कौन सी गणित का प्रयोग करूं जिससे मैं फेसबुक वाली दुनिया को ये बता सकूं कि, फुटबॉल के अलावा आइस हॉकी से लेकर पोलो, डर्बी, बास्केट बॉल, हॉकी तक सब पर मेरी कुछ न कुछ राय है. फुटबॉल क्या किसी भी टूर्नामेंट के शुरू होने से पहले मेरा यही प्रयास रहता है कि, मैं कुछ भी करके अपने फेसबुक वाले दोस्तों को बता सकूं कि मुझसे बड़ा प्रेमी तो इस दुनिया में बना ही नहीं है.
अच्छा चूंकि अभी फुटबॉल वर्ल्ड कप ताजा ताजा खत्म हुआ है. बेहतर है सारा फोकस इसी पर होना चाहिए. इस वर्ल्ड कप के शुरू होने से पहले मेरे अलावा बहुतों के लिए फुटबॉल का मतलब 22 खिलाड़ी, कुछ एक्स्ट्रा, यहां से वहां इधर से उधर भागता रेफरी और गोल पड़ने पर विजय मुस्कान लिए 56 इंची सीना चौड़ा करते कुछ कोच थे. बात अगर टीमों की हो तो औरों की देखा देखी मुझे भी इस बात का पूरा अंदाजा था कि फुटबॉल वर्ल्ड कप अर्जेंटीना, फ्रांस,ब्राजील, बेल्जियम, जर्मनी, इंग्लैंड में से कोई एक जीतेगा. टूर्नामेंट शुरू होने से पहले खिलाडियों के रूप में मैं, मेसी- रोनाल्डो, मुलर, डी कोस्टा, डीसिल्वा,नेमार, को अच्छे से जानता था.
हर खेल पर राय रखने वाले हम भारतीय भी फीफा वर्ल्ड कप 2018 को लेकर काफी उत्साहित थे
भगवान झूठ न बुलाए इनको भी मैं सिर्फ इसलिए जानता था क्योंकि फुटबॉल के नाम पर केवल मैंने इन्हीं लोगों का नाम सुन रखा था. जैसे-जैसे मैच हुए और टीमें राउंड ऑफ 16 से क्वार्टर फाइनल, सेमी फाइनल और फिर फाइनल में आईं मेहनत मुझे भी करनी पड़ी. उधर रूस में टीमें मेहनत इसलिए कर रही थीं ताकि वो कप पर अपनी दावेदारी मजबूत कर सकें, यहां इधर भारत में मैं मेहनत सिर्फ इसलिए कर रहा था कि फुटबॉल वर्ल्ड कप 2018 पर मुझे फेसबुक वाले दोस्तों के सामने बेइज्जती का सामना न करना पड़े. कोई भी समझदार इंसान अगर मेरी स्थिति का आंकलन करे तो कसम से उसके रौंगटे खड़े हो जाएंगे.
ग्रीजमैन, मांजुकिच, मोडरिच, पेरीसिच, पौग्बा, लुकाकू, किलियन एम्बाप्पे, डॉलिच, ह्यूगो लॉरिस, केविन डी ब्रुइन, मारौएन फेलेनी, सैमुअल उम्तीती विडा और सुबासिच ये इतने टफ टफ नाम हैं जिन्हें याद करने में ही आदमी के दांत खट्टे हो जाएं लेकिन सलाम हो मेरे जज्बे को न सिर्फ मैंने इन्हें याद किया बल्कि सही मात्रा लगाकर मैं इन्हें यहां इस लेख में लिख भी रहा हूं और वहां उधर फेसबुक पर भी लिखा.
एक ऐसे देश में जहां फुटबॉल का कोई अस्तित्व नहीं है विश्व कप के प्रति लोगों का रुख हैरत में डालने वाला है
इस फुटबॉल विश्व कप में मुझे खुद पर बहुत हैरत हुई है. सच में, मैंने जितनी मेहनत फेसबुक पर लिखने के लिए इन नामों को याद करने में की. अगर उतनी मेहनत मैं कॉलेज के दिनों में अपनी पढ़ाई में करता तो बात कुछ और होती. भले ही मैं आईएएस का प्रीलिम क्वालीफाई नहीं कर पाता मगर इतना तो पक्का था कि मैं जल निगम या फिर कैनरा बैंक में बाबू तो निश्चित तौर पर बन जाता और ठीक ठाक पैसा कमाता.
आज फीफा विश्व कप 2018 मेरे लिए अतीत है. मुझे याद है हर मैच के शुरू होने से पहले से लेकर खत्म होने तक मैं अपने फेसबुक वाले दोस्तों को पल पल के अपडेट देता था. भले ही मुझे ये नहीं पता हो कि खेल में येलो और रेड कार्ड दिए जाने का क्राइटेरिआ क्या होता है. ऑफ साइड और कॉर्नर क्यों मिलता हो फेसबुक पर लिखा मैंने सबपर. भले ही मुझे इंटरनेट के मकड़जाल का सहारा लेना पड़ा हो मगर मैंने इस पूरे वर्ल्ड कप में बारीक से लेकर बारीक चीज पर अपनी राय पूरी ईमानदारी से रखी.
अब चूंकि विश्व कप खत्म हो गया है लोगों की फुटबॉल के प्रति दीवानगी वापस ठंडे बसते में चली जाएगी
बहरहाल, अब चूंकि सब खत्म हो गया है. क्रोएशिया हार चुकी है, फ्रांस जीत गया है. जिन खिलाड़ियों को गोल्डन बॉल, सिल्वर बॉल, गोल्डन बूट, सिल्वर बूट मिलना था मिल चुका है और यहां तक कि वहां रूस के उस लुज्निकी स्टेडियम में सफाई तक हो गयी होगी मेरे सामने चिंता दूसरी है. अब मुझे दोबारा फेसबुक पर फुटबॉल वाले स्टेटस डालने के लिए 4 सालों का लम्बा इन्तेजार करना पड़ेगा. ऐसा इसलिए क्योंकि मैं एक सीजनल फुटबॉल फैन हूं हां वही फैन जिसकी आइस हॉकी से लेकर पोलो, डर्बी, बास्केट बॉल, हॉकी तक सब पर कुछ न कुछ राय है. ऐसा फैन जिसके अन्दर के खेल वाले कीड़े हर टूर्नामेंट के शुरू होने से पहले जागते हैं और टूर्नामेंट के खत्म होते ही जो वापस गहरी नींद में सो जाते हैं.
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