2012 में निर्भया कांड के बाद नए साल के जश्न के मौके पर बेंगलुरु में लड़कियों से की गई छेड़छाड़ की वारदात ने लोगों को फिर से दहला दिया. एकबार फिर से लड़कियों को कैसे कपड़े पहनने चाहिए, कहां आना-जाना चाहिए और क्या करना चाहिए क्या नहीं के हिदायतों की लिस्ट मिलने लगी. आम आदमी से लेकर नेता तक महिलाओं के रहन-सहन पर सवाल खड़ा करने लगे.
कोई नेता कहता है कि अगर रात को लड़कियां सड़कों पर अकेले घूमती हैं तो उनका रेप होना ही चाहिए. कोई कहता है कि लड़कियों के कपड़े छोटे होंगे तो लड़के तो उत्तेजित हो ही जाएंगे. तो कोई कहता है कि लड़के हैं लड़कों से तो गलती हो ही जाती है. खैर.
एक सच जो देश की हर लड़की को मान लेनी चाहिए कि हमारा समाज पितृसत्तात्मक समाज है. हमारे यहां लड़कों को हर बात की आजादी होती है, चाहे वो लड़की को छेड़ने की हो या देर रात तक सड़कों पर आवारगी करने की. लड़कों से ये अपेक्षा करना ही बेकार है कि वो लड़कियों को सम्मान देंगे या अकेले किसी लड़की को देख उसकी रक्षा करेंगे.
ये और बात है कि इस मानसिकता को बदलने की जरुरत है. और धीरे-धीरे चीजें बदल भी रही हैं. लेकिन सबकुछ एक रात में नहीं बदलने वाला. हर काम में वक्त लगता है और यहां तो एक पूरे समाज की सोच बदलने की बात हो रही है.
खैर तो जबतक समाज की सोच बदले हम लड़कियां घर में बैठे इंतजार तो नहीं कर सकतीं. सारा काम छोड़कर घर में बैठ जाओ ऐसा तो हो नहीं सकता. इसलिए थोड़े बदलाव हमें खुद में ही लाने होंगे. क्योंकि अगर आप खुद सुरक्षित रहेंगी तभी किसी बदलाव में भागीदारी भी निभा सकेंगी. तो आइए आपको बताएं 4 बेसिक बातें जो हमारी अपनी सुरक्षा के लिए जरुरी हैं.
1- खुद को किसी खतरे में ना डालें
ये ठीक है कि हम...
2012 में निर्भया कांड के बाद नए साल के जश्न के मौके पर बेंगलुरु में लड़कियों से की गई छेड़छाड़ की वारदात ने लोगों को फिर से दहला दिया. एकबार फिर से लड़कियों को कैसे कपड़े पहनने चाहिए, कहां आना-जाना चाहिए और क्या करना चाहिए क्या नहीं के हिदायतों की लिस्ट मिलने लगी. आम आदमी से लेकर नेता तक महिलाओं के रहन-सहन पर सवाल खड़ा करने लगे.
कोई नेता कहता है कि अगर रात को लड़कियां सड़कों पर अकेले घूमती हैं तो उनका रेप होना ही चाहिए. कोई कहता है कि लड़कियों के कपड़े छोटे होंगे तो लड़के तो उत्तेजित हो ही जाएंगे. तो कोई कहता है कि लड़के हैं लड़कों से तो गलती हो ही जाती है. खैर.
एक सच जो देश की हर लड़की को मान लेनी चाहिए कि हमारा समाज पितृसत्तात्मक समाज है. हमारे यहां लड़कों को हर बात की आजादी होती है, चाहे वो लड़की को छेड़ने की हो या देर रात तक सड़कों पर आवारगी करने की. लड़कों से ये अपेक्षा करना ही बेकार है कि वो लड़कियों को सम्मान देंगे या अकेले किसी लड़की को देख उसकी रक्षा करेंगे.
ये और बात है कि इस मानसिकता को बदलने की जरुरत है. और धीरे-धीरे चीजें बदल भी रही हैं. लेकिन सबकुछ एक रात में नहीं बदलने वाला. हर काम में वक्त लगता है और यहां तो एक पूरे समाज की सोच बदलने की बात हो रही है.
खैर तो जबतक समाज की सोच बदले हम लड़कियां घर में बैठे इंतजार तो नहीं कर सकतीं. सारा काम छोड़कर घर में बैठ जाओ ऐसा तो हो नहीं सकता. इसलिए थोड़े बदलाव हमें खुद में ही लाने होंगे. क्योंकि अगर आप खुद सुरक्षित रहेंगी तभी किसी बदलाव में भागीदारी भी निभा सकेंगी. तो आइए आपको बताएं 4 बेसिक बातें जो हमारी अपनी सुरक्षा के लिए जरुरी हैं.
1- खुद को किसी खतरे में ना डालें
ये ठीक है कि हम क्या पहनेंगे, क्या खाएंगे, कैसे रहेंगे का निर्णय करने का अधिकार हमें ही होना चाहिए. लेकिन अपनी सुरक्षा के लिए ये भी एक कड़वा सच है कि भड़किले कपड़े नहीं पहनना कभी-कभी फायदा पहुंचाता है. हालांकि इस बात से भी नकारा नहीं जा सकता कि 80 साल की जिन औरतों का रेप होता है वो कोई भड़कीले कपड़े नहीं पहनतीं. या बुर्के में रहने वाली औरत का भी रेप हो जाता है.
लेकिन अगर आपको पता है कि आप किसी पार्टी में या पब में जा रही हैं और आपको अकेले वापस आना है तो एक Shrug जरुर साथ में रख लें. कैब में या ऑटो में बैठने के पहले उसे पहन लें.
2- इतना नशा ना कर लें कि होश ही ना रहे
वोडका, रम, बीयर, व्हीस्की या टकीला जो पीना पिएं, जितना पीना हो पिएं. लेकिन इतना ख्याल जरुर रखें कि घर जाते समय ऐसा ना हो कि कैब या ऑटो में ही आप बेसुध हो जाएं. इससे बेहतर है कि अगर आपको बहुत देर हो गई है और अकेले घर जाने की नौबत है तो किसी दोस्त के पास रुक जाएं. आखिरकार दुर्घटना से देर भली होती है.
3- अपने पार्टनर के साथ अंतरंग होने से पहले आसपास का माहौल देख लें
इसमें कोई दो राय नहीं कि अपने साथी के प्रति प्यार दर्शाने का आपको पूरा अधिकार है. लेकिन अगर आप अपने साथी को पब्लिक प्लेस पर किस करती हैं तो हो सकता है भीड़ में मौजूद कुछ मनचले इसका गलत मतलब निकाल लें. वे ये सोचने लगें कि उनके किस करने से भी आपको दिक्कत नहीं होगी.
4- जांबाज होने में बुराई नहीं है, लेकिन थोड़ा सतर्क भी रहें
परिस्थितियों के हिसाब से काम करने में ही भलाई है. अगर आप अकेली कहीं जा रही हैं और कोई आपका पीछा कर रहा है तो ऐसे समय में ठंडे दिमाग से काम लें. अकेले होने पर ऐसे इंसान से बहस करना फायदेमंद नहीं होता. ऐसे समय में सबसे पहले खुद के लिए एक सुरक्षित स्थान देखें और पुलिस को फोन करें. डरने से उसे आप पर हमला करने का मौका मिल जाएगा.
ऐसा नहीं कि लड़कियों को अपनी मर्जी से जीने का अधिकार नहीं या फिर उनके लिए दायरे निश्चित कर दिए गए हैं. पर कभी-कभी हमें खुद भी ठंडे दिमाग से काम लेना चाहिए. खुद सही-सलामत रहेंगे तभी किसी और की रक्षा कर पाएंगे.
इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. ये जरूरी नहीं कि आईचौक.इन या इंडिया टुडे ग्रुप उनसे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.