क्या आप GST से परेशान हैं? क्या आप नोटबन्दी से परेशान हैं? क्या आपको GSTकी फुल फॉर्म समझ में नहीं आती? क्या GSTकी वजह से काम धंधे को लेकर परेशान हैं? अगर हां तो घबराएं बिल्कुल नहीं और बौराने की कोशिश तो कतई न करें, दिमाग पे गर्मी चढ़ जायेगी. ये GST है जब सरकार इसको नहीं समझ पायी तो तुम ससुरा कौन से ऑक्सफोर्ड से पढ़कर आये हो जो समझ लोगे. नोटबन्दी और GST जबसे लागू किया है खून के आंसू रो रहे हैं. और कान खोलकर सुन लो कोई मास्साब भी रख लोगे ना तो वो भी तुमको कुछ समझा नहीं पायेंगे. बेहतर यही रहेगा कि अपने बच्चों को GST कविता की तरह रटवा दो, ताकि मेहमानों के सामने तुम्हारी इज्जत का फालूदा न बन जाये.
70 साल से तुम्हारे कुछ पल्ले नहीं पड़ा, तब तो तुम कुछ नहीं बोले, मुंह में दही जम गया था तुम्हारे.अब तुमको तुरत फुरत GST समझना है, अरे अभी तक हम तो समझ न पाये, तुमको समझा दें. ऊपर से ये बूढ़े पता नहीं कहां-कहां से बिल में से निकल कर आ जाते हैं. हमको अर्थव्यवस्था समझा रहे हैं, जीडीपी समझा रहे हैं, महंगाई दर समझा रहे हैं. अरे हम कभी बचपन से न समझे, तो अब क्या खाक समझेंगे. हम तो कुछ तूफानी करने के चक्कर में थे. ये चाय-केतली के चक्कर में सब गड़बड़ हो गया.
अब तुम लोग तो ऐसे हो कि तुमको टीवी में विज्ञापन देकर समझाना पड़ता है कि अपनी सोच को बाहर निकालने के लिये खुले में नहीं, घर के अन्दर जाओ. ऊपर से कहते हो कि GST समझ नहीं आता. भगवान कृष्ण ने भी कहा है. 'हे अर्जुन परिवर्तन इस दुनिया का नियम है, जीएसटी उसी का परिणाम है. कल तक जो बिक्री कर था, आज वो वैट है जो कल जीएसटी हो जाएगा. इसमे तुम्हें विलाप करने या पछताने की क्या आवश्यकता है?
बताओ भगवान को मानते हो कि नहीं, अगर मानते हो, तो भगवान...
क्या आप GST से परेशान हैं? क्या आप नोटबन्दी से परेशान हैं? क्या आपको GSTकी फुल फॉर्म समझ में नहीं आती? क्या GSTकी वजह से काम धंधे को लेकर परेशान हैं? अगर हां तो घबराएं बिल्कुल नहीं और बौराने की कोशिश तो कतई न करें, दिमाग पे गर्मी चढ़ जायेगी. ये GST है जब सरकार इसको नहीं समझ पायी तो तुम ससुरा कौन से ऑक्सफोर्ड से पढ़कर आये हो जो समझ लोगे. नोटबन्दी और GST जबसे लागू किया है खून के आंसू रो रहे हैं. और कान खोलकर सुन लो कोई मास्साब भी रख लोगे ना तो वो भी तुमको कुछ समझा नहीं पायेंगे. बेहतर यही रहेगा कि अपने बच्चों को GST कविता की तरह रटवा दो, ताकि मेहमानों के सामने तुम्हारी इज्जत का फालूदा न बन जाये.
70 साल से तुम्हारे कुछ पल्ले नहीं पड़ा, तब तो तुम कुछ नहीं बोले, मुंह में दही जम गया था तुम्हारे.अब तुमको तुरत फुरत GST समझना है, अरे अभी तक हम तो समझ न पाये, तुमको समझा दें. ऊपर से ये बूढ़े पता नहीं कहां-कहां से बिल में से निकल कर आ जाते हैं. हमको अर्थव्यवस्था समझा रहे हैं, जीडीपी समझा रहे हैं, महंगाई दर समझा रहे हैं. अरे हम कभी बचपन से न समझे, तो अब क्या खाक समझेंगे. हम तो कुछ तूफानी करने के चक्कर में थे. ये चाय-केतली के चक्कर में सब गड़बड़ हो गया.
अब तुम लोग तो ऐसे हो कि तुमको टीवी में विज्ञापन देकर समझाना पड़ता है कि अपनी सोच को बाहर निकालने के लिये खुले में नहीं, घर के अन्दर जाओ. ऊपर से कहते हो कि GST समझ नहीं आता. भगवान कृष्ण ने भी कहा है. 'हे अर्जुन परिवर्तन इस दुनिया का नियम है, जीएसटी उसी का परिणाम है. कल तक जो बिक्री कर था, आज वो वैट है जो कल जीएसटी हो जाएगा. इसमे तुम्हें विलाप करने या पछताने की क्या आवश्यकता है?
बताओ भगवान को मानते हो कि नहीं, अगर मानते हो, तो भगवान के नाम पर ही समझ जाओ. और नहीं मानते हो तो पक्का फिर तो तुम न भक्त हो और न देशभक्त हो और अगर ज्यादा मैकेनिक बनने की कोशिश कि तो मानहानि का मुकदमा धर दूंगा अलग से. अब अपनी आलिया भट्ट को ही देखलो, एक बार उसने पूछा ये GST क्या है? मैंने बोला बेटा G-गुड नाइट, S-स्वीट ड्रीम्स, T-टेक केयर.
बस तबसे महेश भट्ट की समझदार बच्ची ने दूसरा सवाल नहीं पूछा. और तुम हो कि अब तक GST नहीं समझ पा रहे हो. लगता है कभी स्कूल नहीं गये थे तुम. अब कहीं ये मत पूछ लेना कि हिन्दी में GST को क्या कहते हैं ? हम कुछ समझा न पायेंगे. तीन महीने हो गये, सब तीन तीरा हुआ जा रहा है.
अब तुम सोचो हमने तब से GST लागू कर दिया था, जब नियम तैयार नहीं था, व्यापारियों को पता नहीं था, फॉर्म तैयार नहीं था, सॉफ्टवेर इन्स्टॉल नहीं था. और हमको तो खैर पूछो ही मत. हमको तो कुछ पता ही नहीं था. और इसी चक्कर में दीवाली से पहले दिवाला निकला जा रहा है.और ये मुए चुनाव भी बड़ी जल्दी- जल्दी आ जाते हैं. अभी अपना रट्टा ठीक से लगा नहीं है, रैलियों में और समझना पड़ेगा. वैसे ये GST का आइडिया था किसका? इसके चक्कर में अपना पूरा करियर चौपट हो गया.
भैया, एक नाम समझ में आ रहा है, मगर गुजरात में ही काम कर सकता है वो. गुजरात वाले चाहें तो इसका नाम गुजरात स्पेशल टी रख सकते हैं, चल भी जायेगा, चुनावी मौसम है. चाय का नशा तो वैसे भी सर चढ़कर बोलता है. यूपी का चुनाव होता तो इसका नाम बदलकर गौ सेवा टैक्स रख देते. बाकी देश के लिये इसका नाम 'दीनदयाल उपाध्याय कुछ न समझोगे तुम' रख देते हैं, कोई सवाल भी नहीं करेगा. और अपनी तो जय-जय है ही.
ये भी पढ़ें -
रहम करो... GST के बाद मोदी फिर निकले वसूली पर!
गिरा हुआ GDP तो सिर्फ ट्रेलर है... पिक्चर अभी बाकी है
GST: दिवाली का तोहफा नहीं ये गलती सुधारने की कोशिश है...
इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं. ये जरूरी नहीं कि आईचौक.इन या इंडिया टुडे ग्रुप उनसे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.