भारत की क्रिकेट टीम ने श्रीलंका के विरुद्ध टेस्ट श्रृंखला जीतने के बाद, अब एक दिवसीय श्रृंखला में भी अजेय बढ़त हासिल कर ली है. पहला एक दिवसीय मैच पूरी तरह से एक तरफा रहा, जिसमें श्रीलंका की बल्लेबाजी कुछ भी कमाल न कर पाई. भारत की ओर से शिखर धवन ने शतकीय पारी खेली. शिखर और विराट कोहली की नाबाद पारी की बदौलत भारत ने पहला मैच बड़ी आसानी से जीत लिया.
दूसरे एक दिवसीय में श्रीलंका के स्कोर का पीछा करते हुए हालांकि भारत की पारी ज़रूर लड़खड़ा गई थी. अकिला धनंजय ने जल्दी जल्दी 6 विकेट झटक लिए और भारत को बड़ी समस्या में डाल दिया. महेंद्र सिंह धोनी और भुवनेश्वर कुमार के बीच आठवें विकेट की नाबाद पारी ने भारत को फिर विजय श्री दिला दी. मध्य क्रम तीसरे मैच में एक बार फिर फेल हो गया. पुन: महेंद्र सिंह धोनी को रोहित शर्मा के साथ मिलकर टीम इंडिया को जीत की रेखा के पार ले जाना पड़ा.
कई खेल विश्लेषक महेंद्र सिंह धोनी की बुराई करते नहीं थकते. उनका कहना है कि धोनी को टेस्ट मैच की तरह एकदिवसीय क्रिकेट से भी सन्यास ले लेना चाहिए. लेकिन बार बार धोनी अपने आलोचकों को मैदान के अपने प्रदर्शनों से चुप करा चुके हैं. इतने सालों के खेल के बावजूद भी लोग धोनी के महत्व को समझ नहीं पाए हैं. विकेट कीपिंग हो, निचले क्रम के बालेबाज़ों के साथ बालेबाज़ी करना हो, नज़दीकी स्थिति में परेशान हुए बिना विवेकशील बने रहना हो, यह सारी खूबियां धोनी में दिखाई देती हैं. इन विशेषताओं के कारण ही धोनी इतने सफल कप्तान रहे हैं.
विराट कोहली तो खुशकिस्मत हैं कि उनकी टीम में महेंद्र सिंह धोनी जैसा एक वरिष्ट खिलाड़ी है, जो ज़रूरत पड़ने पर उनका मार्ग...
भारत की क्रिकेट टीम ने श्रीलंका के विरुद्ध टेस्ट श्रृंखला जीतने के बाद, अब एक दिवसीय श्रृंखला में भी अजेय बढ़त हासिल कर ली है. पहला एक दिवसीय मैच पूरी तरह से एक तरफा रहा, जिसमें श्रीलंका की बल्लेबाजी कुछ भी कमाल न कर पाई. भारत की ओर से शिखर धवन ने शतकीय पारी खेली. शिखर और विराट कोहली की नाबाद पारी की बदौलत भारत ने पहला मैच बड़ी आसानी से जीत लिया.
दूसरे एक दिवसीय में श्रीलंका के स्कोर का पीछा करते हुए हालांकि भारत की पारी ज़रूर लड़खड़ा गई थी. अकिला धनंजय ने जल्दी जल्दी 6 विकेट झटक लिए और भारत को बड़ी समस्या में डाल दिया. महेंद्र सिंह धोनी और भुवनेश्वर कुमार के बीच आठवें विकेट की नाबाद पारी ने भारत को फिर विजय श्री दिला दी. मध्य क्रम तीसरे मैच में एक बार फिर फेल हो गया. पुन: महेंद्र सिंह धोनी को रोहित शर्मा के साथ मिलकर टीम इंडिया को जीत की रेखा के पार ले जाना पड़ा.
कई खेल विश्लेषक महेंद्र सिंह धोनी की बुराई करते नहीं थकते. उनका कहना है कि धोनी को टेस्ट मैच की तरह एकदिवसीय क्रिकेट से भी सन्यास ले लेना चाहिए. लेकिन बार बार धोनी अपने आलोचकों को मैदान के अपने प्रदर्शनों से चुप करा चुके हैं. इतने सालों के खेल के बावजूद भी लोग धोनी के महत्व को समझ नहीं पाए हैं. विकेट कीपिंग हो, निचले क्रम के बालेबाज़ों के साथ बालेबाज़ी करना हो, नज़दीकी स्थिति में परेशान हुए बिना विवेकशील बने रहना हो, यह सारी खूबियां धोनी में दिखाई देती हैं. इन विशेषताओं के कारण ही धोनी इतने सफल कप्तान रहे हैं.
विराट कोहली तो खुशकिस्मत हैं कि उनकी टीम में महेंद्र सिंह धोनी जैसा एक वरिष्ट खिलाड़ी है, जो ज़रूरत पड़ने पर उनका मार्ग दर्शन कर सकता है. धोनी के अलावा इस समय टीम इंडिया में कोई ऐसा खिलाड़ी नहीं है जिसे कोहली से अधिक अनुभव हो. इस स्थिति में धोनी जब तक स्वस्थ रहे, पूरी तरह फिट हो, उन्हें एक दिवसीय क्रिकेट खेलते रहना चाहिए. धोनी जिस तरह का खेल अभी खेल रहे हैं, वह आसानी से अगला क्रिकेट विश्व कप खेल सकते हैं.
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